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Tuesday, 23 August 2016




भीमताल से वापसी


भीमताल से वापसी

नैनीताल से काळाडूंगी और भीमताल बिलकुल विपरीत दिशा मे है । इसलिए वहाँ से काळाडूंगी जाने का कोई औचित्य नहीं था । हमने वाया हल्द्वानी जाने का फैसला किया । यहाँ से काठगोदाम 10 कि0मी0 है । हम काठगोदाम होते हुए हल्द्वानी पहुँच गए । जो काठगोदाम से 18 कि0 मी0 है । 


मुझे पता नहीं था हल्द्वानी इतना बड़ा शहर है । मैं तो इसे छोटा मोटा शहर समझता था । शहर मे चलते हुए एक मॉल दिखाई दिया । बस सारे मॉल में घूमने को कहने लगे । ड्राइवर ने यानी मैंने फ़ौरन आदेश का पालन किया । सब लोग मॉल में चले गए । मैंने गाड़ी बेसमेंट में पार्किंग में लगाई और ऊपर मॉल में आ गया । यहाँ सबसे पहले काशीपुर का रास्ता पूछा ।    हमारा इस रास्ते से आने का कोई प्रोग्राम नहीं था । इसलिए नेट से इस रास्ते की कोई जानकारी नहीं ली थी । इसलिए जरूरी था कि सही रास्ते की जानकारी ले ली जाये । एक समझदार व्यक्ति मिल गया । उसने बताया कि आप रुद्रपुर होते हुए जाओ । ये रास्ता सबसे छोटा है । उसने ये भी बताया कि अगले चौराहे से सीधे हाथ मुड़ कर थोडा आगे जा कर उल्टे हाथ मुड़ जाना । यही सबसे छोटा रास्ता रहेगा । लगभग 1 घंटे वहाँ रुक कर हम फिर वापसी के लिए चल दिए । अब लगभग 1 बज रहा था ।
अब हम रुद्रपुर के लिए चल दिए । चौराहों पर रास्ता कंफर्म करते रहे । ताकि गलत रास्ते पर न चले जाये । रुद्र पुर करीब 35 कि0मी0 पड़ा । रुद्रपुर से सीधे हाथ काशीपुर के लिए मुड़ गए । रुद्रपुर पार करके सबको भूख लगने लगी थी । एक रेस्टोरेंट पर गाड़ी रोक ली । और एक टेबल पकड़ ली । हमारे बराबर में एक दूसरा परिवार बैठा था । वो नॉनवेज खा रहा था । हमारे घरवालों ने वहाँ खाने से मना कर दिया । हम उठ कर चल दिए । आगे मुझे हिदायत मिली की गाड़ी वही रोकना जहाँ सिर्फ वेज खाना मिलता हो । हमने कई रेस्टोरेंट और ढाबो पर पूछा पर सब जगह नॉनवेज मिल रहा था । ये इलाका पंजाबी बाहुल्य है । और वो नॉनवेज खाते है । हमें चलते चलते और पूछते पूछते 3 बज गए । लेकिन हमें जिद थी की वेज ढाबे में ही खाना है । तभी एक छोटा सा ढाबा नजर आया । मैं नाउम्मीद था फिर भी मैंने अपने बड़े बेटे पुलकित को पूछने भेज दिया । उसने जा कर पूछा "अंकल खाने में नॉन वेज है " । ढाबे वाले ने उसे घूर कर देखा और गुस्से में बोला "नहीं , यहाँ सिर्फ शाकाहारी मिलता है" । पुलकित वही से हमारी तरफ देख कर चिल्लाया " आ जाओ" । मैने गाड़ी साइड मे लगा दी और हम सब उतर कर उसके ढाबे में पहुच गए । वो अभी भी हमें संशय भरी नजरों से देख रहा था । हम बैठ गए । दाल , रोटी , और सब्जी का आर्डर दिया । अब ढाबे के मालिक की जान में जान आयी । पता नहीं खाना बहुत अच्छा था या हमें भूख बहुत ज्यादा लगी थी , सब ने खूब जम कर खाया । 4 बजे हम वहाँ से चले अब हमें कोई जल्दी नहीं थी । हमारा लक्ष्य सिर्फ मुज़फ्फरनगर था । जसपुर पहुच कर फिर वही समस्या आई की बीजनोर जाने के दो रास्ते थे । इस बार हमने ठोक बजा कर बीजनोर का छोटा रास्ता पूछा । अब हम धामपुर वाले रास्ते से बीजनोर पहुच गए । लगभग 7 बजे हम बिजनोर पार कर गए । ये अच्छा ही रहा क्यंकि बिजनोर जो खादर का इलाका कहलाता है । हम दिन में ही पार कर गए । और 8 बजे आराम से अपने घर पहुँच गए ।

इस तरह नैनीताल की एक ख़ूबसूरत यात्रा समाप्त हुई ।